उकसावे (Abetment) की संपूर्ण व्याख्या
परिचय:
उकसावे (Abetment) की संकल्पना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 107 से 120 तक विस्तृत रूप से वर्णित है। इसका अर्थ किसी अपराध को प्रत्यक्ष रूप से न करते हुए, लेकिन उसके लिए किसी अन्य व्यक्ति को प्रेरित करना, उसे सहयोग देना, या उसे करने के लिए उकसाना होता है। यह एक प्रकार का अप्रत्यक्ष अपराध है, जिसमें व्यक्ति स्वयं अपराध नहीं करता, लेकिन वह किसी अन्य व्यक्ति को अपराध करने के लिए प्रेरित करता है।
उकसावे की परिभाषा:
भारतीय दंड संहिता की धारा 107 के अनुसार, जब कोई व्यक्ति किसी अपराध को करने के लिए उकसाता है, उसमें सहायता करता है या उसे अंजाम देने की योजना में किसी भी प्रकार से सहयोग देता है, तो उसे "उकसाने वाला" (Abettor) कहा जाता है और यह कृत्य "उकसावे" (Abetment) की श्रेणी में आता है।
उकसावे के तत्व (Essential Elements of Abetment):
1. अपराध का अस्तित्व: अपराध का होना आवश्यक नहीं है, लेकिन अपराध करने की मंशा होनी चाहिए।
2. उकसाने वाले का संलिप्त होना: किसी भी प्रकार से व्यक्ति को प्रेरित या सहायता प्रदान करना।
3. सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव: अपराध करने में सहयोग या प्रेरणा देना प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो सकता है।
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उकसावे के प्रकार (Types of Abetment)
IPC की धारा 107 में उकसावे को तीन भागों में विभाजित किया गया है:
1. उकसाने (Instigation) द्वारा उकसावे
यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को अपराध करने के लिए प्रेरित करता है, तो यह उकसाने के अंतर्गत आता है। यह प्रेरणा मौखिक, लिखित, संकेतों, या इशारों के माध्यम से दी जा सकती है।
उदाहरण:
कोई व्यक्ति दूसरे को हत्या के लिए उकसाने हेतु बार-बार उसे बदला लेने के लिए कहता है।
कोई नेता अपने समर्थकों को हिंसा करने के लिए भड़काता है।
2. षड्यंत्र (Conspiracy) द्वारा उकसावे
यदि दो या अधिक व्यक्ति किसी अपराध को अंजाम देने के लिए योजना बनाते हैं और उस योजना के तहत कोई कार्य किया जाता है, तो यह षड्यंत्र द्वारा उकसावे की श्रेणी में आता है।
उदाहरण:
दो लोग मिलकर किसी को चोरी करने के लिए तैयार करते हैं और चोरी की योजना बनाते हैं।
किसी आतंकवादी हमले के लिए योजना बनाई जाती है और उसमें सहयोग दिया जाता है।
3. सहायता (Aiding) द्वारा उकसावे
जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को अपराध करने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करता है, तो यह "सहायता द्वारा उकसावे" कहलाता है। सहायता वित्तीय, भौतिक, या मानसिक रूप से हो सकती है।
उदाहरण:
कोई व्यक्ति चोरी करने के लिए औजार प्रदान करता है।
कोई व्यक्ति अपराधी को छिपने के लिए स्थान देता है।
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उकसावे का संपन्न होना (How Abetment is Committed)
उकसावे को विभिन्न तरीकों से अंजाम दिया जा सकता है, जैसे कि:
1. प्रत्यक्ष उकसावा (Direct Instigation): जब कोई व्यक्ति स्पष्ट रूप से किसी को अपराध करने के लिए प्रेरित करता है।
2. अप्रत्यक्ष उकसावा (Indirect Instigation): जब कोई व्यक्ति संकेतों या इशारों से किसी को अपराध करने के लिए प्रेरित करता है।
3. सहयोग प्रदान करना (Providing Assistance): जब कोई व्यक्ति अपराध को संपन्न करने के लिए साधन या सहायता प्रदान करता है।
4. षड्यंत्र में भाग लेना (Participating in Conspiracy): जब कोई व्यक्ति योजना में शामिल होकर अपराध करने में सहायता करता है।
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न्यायिक दृष्टिकोण एवं उदाहरण
भारतीय न्यायालयों ने कई मामलों में उकसावे की अवधारणा को परिभाषित किया है। उदाहरण के लिए:
केदार नाथ सिंह बनाम बिहार राज्य (1962): इस मामले में स्पष्ट किया गया कि यदि किसी व्यक्ति को हिंसा करने के लिए प्रेरित किया जाता है, तो यह उकसावे की श्रेणी में आता है।
एम. मोहन बनाम तमिलनाडु राज्य (2011): आत्महत्या के लिए उकसावे से संबंधित मामला, जिसमें आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वाले को दंडित किया गया।
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निष्कर्ष (Conclusion)
उकसावे की धारणा भारतीय दंड संहिता के तहत एक महत्वपूर्ण अपराध है। यह किसी अपराध को स्वयं न करने के बावजूद, उसे करवाने की मंशा से प्रेरित होने पर लागू होता है। इसका उद्देश्य समाज में अपराधों को रोकना और उनके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को दंडित करना है। इस प्रकार, उकसावे के प्रकारों एवं इसके संपन्न होने के तरीकों को ध्यान में रखते हुए, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से अपराध किए बिना भी अपराधी ठहराया जा सकता है, यदि वह किसी अन्य को अपराध करने के लिए प्रेरित करता है, सहयोग देता है, या उसकी योजना में भागीदार बनता है।
Reviewed by Dr. Ashish Shrivastava
on
अप्रैल 02, 2025
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